Musings

A random collection

Archive for September 2011

INDIA: Zindagi Kyun Na Milegi Dobaara

प्रथम कविता:
पिघले नीलम सा बहता हुआ ये समा,
नीली नीली सी खामोशियाँ
ना कहीं है ज़मीन ना कहीं आसमान,
सरसराती हुई टहनियां पत्तियाँ
कह रहीं है बस एक तुम हो यहाँ,
सिर्फ मैं हूँ, मेरी सांसें हैं और मेरी धडकनें,
ऐसी गहराइयाँ, ऐसी तनहाइयाँ, और मैं, … सिर्फ मैं,
अपने होने पर मुझको यकीन आ गया

द्वितीय कविता:
इक बात होंटों तक है जो आई नहीं,
बस आँखों से है झांकती,
तुमसे कभी, मुझसे कभी,
कुछ लव्ज़ है वो मांगती,
जिनको पहनके होंटों तक आ जाए वो
आवाज़ की बाहों में बाहें डालके इठलाये वो,
लेकिन जो ये इक बात है,
अहसास ही अहसास है

खुशबू सी है जैसे हवा में तैरती
खुशबू जो बे-आवाज़ है,
जिसका पता तुमको भी है
जिसकी खबर मुझको भी है
दुनिया से भी छुपता नहीं
ये जाने कैसा राज़ है

तृतीय कविता:
जब जब दर्द का बादल छाया
जब ग़म का साया लहराया
जब आंसू पलकों तक आया
जब ये तन्हा दिल घबराया
हमने दिल को ये समझाया
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है
दुनिया में यूँ ही होता है
ये जो गहरे सन्नाटें हैं
वक्त ने सबको ही बाटें हैं
थोडा गम है सबका किस्सा
थोड़ी धूप है सबका हिस्सा
आग तेरी बेकार ही नम है
हर पल एक नया मौसम है
क्यूँ तू ऐसे पल खोता है
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है

चौथी कविता:
दिलों में तुम अपनी बेताबियाँ ले के चल रहे हो तो जिंदा हो तुम
नज़र में ख्वाबों की बिजलियाँ ले के चल रहे हो तो जिंदा हो तुम
हवा के झोकों के जैसे आज़ाद रहना सीखो
तुम एक दरिया के जैसे लहरों में बहना सीखो
हर एक लम्हे से तुम मिलो खोले अपनी बाहें
हर एक पल एक नया समा देखें ये निगाहें
जो अपनी आँखों में हैरानियाँ ले के चल रहे हो तो जिंदा हो तुम
दिलों में तुम अपनी बेताबियाँ ले के चल रहे हो तो जिंदा हो तुम

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Written by curious

September 9, 2011 at 2:01 pm

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